Hello Friends, I'm glad to share my another poem with all of you. You all have appreciated my last poem...thank u so much for that. Hope this poem will also touch your heart. My all energy comes from you and your reviews, so comment like and share. your suggestions and reviews are heartily welcome... thank you.
!!! नई राह !!!
मन की एक आवाज़ पर;
चल पड़ा मैं उस राह;
जिस राह पे लाखों चलते हैं;
लिए हजारों चाह।
हूँ बेख़बर इस बात से,
इस भीड़ की आवाज़ से,
जो कह रहें रुक जा ज़रा,
तू क्यों चल रहा इस राह पे।
ये गधों की चाल है;
ये जग का मायाजाल है;
तू खुद से अपनी राह चुन;
तुझे क्या मंजिल की दरकार है।
फिर भी चला मैं जा रहा;
अपने स्वप्नपुर्ति की आश में;
जिंदगी को त्याग कर;
जिंदगी की तलाश में।
यहां सबका एक ही हाल है
सभी चल रहें गधों की चाल हैं;
सपने अलग हैं सबके मगर;
फिर क्यों सबकी एक ही राह है।
ऐ मुसाफ़िर तू सुन ज़रा;
तू एक नई-सी राह चुन;
अपनी एक अलग पहचान दे;
करना है तुझे सबसे अलग;
तो कुछ नया अंजाम दे;
तू एक नई-सी राह चुन।
तू एक नई-सी राह चुन।।
चल पड़ा मैं उस राह;
जिस राह पे लाखों चलते हैं;
लिए हजारों चाह।
हूँ बेख़बर इस बात से,
इस भीड़ की आवाज़ से,
जो कह रहें रुक जा ज़रा,
तू क्यों चल रहा इस राह पे।
ये गधों की चाल है;
ये जग का मायाजाल है;
तू खुद से अपनी राह चुन;
तुझे क्या मंजिल की दरकार है।
फिर भी चला मैं जा रहा;
अपने स्वप्नपुर्ति की आश में;
जिंदगी को त्याग कर;
जिंदगी की तलाश में।
यहां सबका एक ही हाल है
सभी चल रहें गधों की चाल हैं;
सपने अलग हैं सबके मगर;
फिर क्यों सबकी एक ही राह है।
ऐ मुसाफ़िर तू सुन ज़रा;
तू एक नई-सी राह चुन;
अपनी एक अलग पहचान दे;
करना है तुझे सबसे अलग;
तो कुछ नया अंजाम दे;
तू एक नई-सी राह चुन।
तू एक नई-सी राह चुन।।
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